Vidrohi Shayari Hindi | विद्रोही शायरी हिंदी

vidroh shayari

Vidroh | Vidrohi | विद्रोह | विद्रोही है कही भी द्रोह तो, विद्रोह को साकार दे है तेरे हाथ तेरी जिंदगी, तू जिंदगी सँवार दे हुई भला ये बात क्या जिगर में भी धुआँ रहे है गर जिगर में आग तो, धरा पे तू उतार दे। hai kahi bhi droh to, vidroh ko sakar de … Read more