राम नवमी २०२२, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, श्लोक ,राम जन्म के सोहर, राम भजन एवं रामनवमी शुभकामना सन्देश एवं शायरी | RAM NAVAMI 2022, SHUBH MUHURT, PUJA VIDHI, MANTRA, SHLOKA, RAM JANM KE SOHAR, RAM NAVMI SHUBHKAMNA SANDESH EVAM SHAYARI

क्यों मनाते हैं राम नवमी ? राम भारत वर्ष के लिए कितना महत्व रखते हैं ?  

नौमी तिथि मधुमास पुनीता, शुकल पच्छ अभिजीत हरि प्रीता. 

मध्य दिवस अति धूप न घामा, प्रकटे अखिल लोक विश्रामा. 

भावार्थ-

पवित्र चैत्र का महीना था, नवमी तिथि थी। शुक्ल पक्ष और भगवान का प्रिय अभिजित मुहूर्त था। दोपहर का समय था। न बहुत सर्दी थी, न धूप (गरमी) थी। उसी वक्त पुरे संसार को सुख देने वाले प्रभु श्री राम का जन्म हुआ।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था. हर साल इस दिन को भगवान राम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. भगवान राम का जन्म दोपहर में हुआ था। मध्याह्न जो छह घाटियों (लगभग 2 घंटे और 24 मिनट) तक चलता है, राम नवमी पूजा अनुष्ठान करने के लिए सबसे शुभ समय है। मध्याह्न का मध्य बिंदु उस क्षण का प्रतीक है जब श्री राम का जन्म हुआ था और मंदिर इस क्षण को भगवान राम के जन्म के क्षण के रूप में दर्शाते हैं। इस दौरान श्री राम का जप और उत्सव अपने चरम पर पहुंच जाता है।

जब जब होई धर्म की हानि, बारहि असुर अधम अभिमानी.

तब तब धर प्रभु विविध शरीरा, हरहि दयानिधि सज्जन के पीड़ा.

जब जब विश्व में धर्म की हानि होती है और असुर अधार्मिक एवं अभिमानी प्रवृत्ति के लोग बढ़ने लगते है तब तब भगवान अलग अलग शरीर धारण करके असुरों का अंत करके संत सहृद लोगो को मुक्ति प्रदान करते हैं .. त्रेता युग में जब अधर्म अपने चरम पर पहुँच गया तो भगवान विष्णु ने प्रभु श्री राम के रूप में अवतरित होकर धर्म की स्थापना की एवं लोगो को मर्यादा का पाठ पढ़ाया| मनुष्य को किस तरह से आचरण करना चाहिए यह भी प्रभु श्री राम ने अपने आचरण से लोगो को सिखाया एवं एक उत्तम न्याय व्यवस्था जिसमे सभी स्त्री पुरुष समान रूप से शामिल किये गये, स्थापित किया जिसे राम राज्य कहा गया | उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही आज भारत विश्व गुरु कहलाता है | इसलिए राम नवमी का महत्व बढ़ जाता है |

जानें इस बार राम नवमी 2022 कब है? राम नवमी पूजा विधि क्या है?

RAM NAVAMI 2022 DATE SHUBH MUHURAT | रामनवमी तारीख, शुभ मुहूर्त

भगवान राम के जन्म दिवस को मनाने का सही समय सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच है.

राम नवमी रविवार, अप्रैल 10, 2022 को

राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त – 11:06 सुबह से 01:39 दोपहर अवधि – 02 घण्टे 33 मिनट्स

राम नवमी मध्याह्न का क्षण – 12:23 दोपहर

नवमी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 10, 2022 को 01:23 सुबह बजे

नवमी तिथि समाप्त – अप्रैल 11, 2022 को 03:15 दोपहर बजे

RAM NAVAMI PUJA VIDHI | रामनवमी पूजा विधि

राम नवमी पूजा में सोलह चरण शामिल हैं जो षोडशोपचार (षोडशोपचार) राम नवमी पूजा विधि का हिस्सा हैं. डिटेल में जानें…

1. ध्यानम

पूजा की शुरुआत भगवान राम के ध्यान से करनी चाहिए. ध्यान आपके सामने पहले से स्थापित भगवान राम की मूर्ति के सामने किया जाना चाहिए. भगवान श्री राम का ध्यान करते हुए निम्नलिखित मंत्र का जाप करना चाहिए.

कोमलक्षम विशालाक्षमिंद्रनिला सम्प्रभम। दक्षिणंगे दशरथं पुत्रवेक्षनतत्परम्॥

पृष्टतो लक्ष्मणम् देवं सच्छत्रम् कनकप्रभम। पार्श्व भरत शत्रुघ्नौ तलावृंतकरवुभौ।

अग्रव्यग्राम हनुमंतम रामानुग्रह कंक्षीणम ओम श्री रामचंद्राय नमः।

ध्यानत ध्यानं समरपयामी

2. आवाहनं :

भगवान राम के ध्यान के बाद, मूर्ति अथवा फोटो के सामने आवाहन मुद्रा दिखाकर (दोनों हथेलियों को जोड़कर और दोनों अंगूठों को अंदर की ओर मोड़कर आवाहन मुद्रा बनती है). आवाहन करें.

3. आसनम :

भगवान राम का आह्वान करने के बाद, अंजलि (दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर) में पांच पुष्प लें और उन्हें मूर्ति के सामने छोड़ दें. प्रभु राम को आसन दें .

4. पद्य :

भगवान राम को आसन देने के बाद उनके पैर धोने के लिए जल समर्पित करें.

5. अर्घ्य :

पद्य-अर्पण के बाद प्रभु राम का सिर अभिषेक करते हुए जल समर्पित करें.

6. अचमनीयम :

अर्घ्य के बाद अचमन के लिए श्री राम को जल समर्पित करें. इस मंत्र के द्वारा करे आचमन

ॐ केशवाय नम:, ॐ नाराणाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ हृषीकेशाय नम:

इस मंत्र के द्वारा अंगूठे से मुख पोछ लें ,ॐ गोविंदाय नमः यह मंत्र बोलकर हाथ धो लें 

7. मधुपर्क :

आचमन के बाद श्री राम को शहद और दूध का भोग लगाएं.

8. स्नानम :

मधुपर्क अर्पण के बाद श्री राम को स्नान के लिए जल समर्पित करें.

9. पंचामृत स्नान :

स्नानम के बाद अब श्री राम को पंचामृत यानी दूध, दही, शहद, घी और चीनी के मिश्रण से स्नान कराएं.

10. वस्त्र :

अब श्री राम को नए वस्त्र के रूप में मोली समर्पित करें.

11. यज्ञोपवीत :

वस्त्र देने के बाद श्री राम को यज्ञोपवीत समर्पित करें.

12. गंध :

यज्ञोपवीत समर्पित करने के बाद श्री राम को सुगंध समर्पित करें.

13. पुष्पनी :

गंधा चढ़ाने के बाद, भगवान राम को पुष्प चढ़ाएं.

14. अथा अंग पूजा :

अब उन देवताओं की पूजा करें जो स्वयं श्री राम के अंग हैं. उनके लिए बाएं हाथ में गंध, अक्षत और पुष्प लें और उसे दाहिने हाथ से भगवान राम की मूर्ति अथवा फोटो के पास छोड़ दें.

15. धूपम :

अंग पूजा के बाद श्री राम को धूप समर्पित करें.

16. दीपम :

धूपदान के बाद श्री राम को दीप समर्पित करें. दीप समर्पित करने का मंत्र

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।

दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।।

17. नैवेद्य :

दीप अर्पण के बाद श्री राम को नैवेद्य समर्पित करें.

18. फलम :

नैवेद्य चढ़ाने के बाद हुए श्री राम को फल समर्पित करें.

19. तंबुलम :

फल चढ़ाने के बाद, श्री राम को तंबुला ( पान) समर्पित करें.

20. दक्षिणा :

तंबुला चढ़ाने के बाद, श्री राम को दक्षिणा (उपहार) समर्पित करें.

21. निरजन (नीराजन):

अब श्री राम की निरंजन (आरती) करें.

22. पुष्पांजलि :

अब श्री राम को पुष्पांजलि समर्पित करें.

23. प्रदक्षिणा :

अब प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा यानी श्री राम के बाएं से दाएं परिक्रमा को फूलों से करें.

24. क्षमापन :

प्रदक्षिणा के बाद, पूजा के दौरान की गई किसी भी ज्ञात-अज्ञात गलती के लिए श्री राम से क्षमा मांगें.

क्षमा मांगने के लिए इस मंत्र का करें जाप.
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥

राम जन्म के पश्चात् इस छंद को गायें जो कि तुलसीदास द्वारा रचित है (भये प्रकट कृपाला )

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी ।

हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी ॥

लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी ।

भूषन बनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी ॥

कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी, केहि बिधि करूं अनंता ।

माया गुन ग्यानातीत अमाना, वेद पुरान भनंता ॥

करुना सुख सागर, सब गुन आगर, जेहि गावहिं श्रुति संता ।

सो मम हित लागी, जन अनुरागी, भयउ प्रगट श्रीकंता ॥

ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया, रोम रोम प्रति बेद कहै ।

मम उर सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर न रहै ॥

उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना, चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।

कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥

माता पुनि बोली, सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा ।

कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला, यह सुख परम अनूपा ॥

सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना, होइ बालक सुरभूपा ।

यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं, ते न परहिं भवकूपा ॥

भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी ।

हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी ॥

Bhaye Pragat Kripala Deen Dayala Kaushalya Hitakari |
Harshit Mahataaree Muni Man Haaree Adbhut Roop Vichaaree |
Lochan Abhiraama Tanu Ghanasyaama Nij Aayudh Bhuj Chaaree |
Bhooshan Vanamaala Nayan Bisaala Shobhaasindhoo Kharaaree |
Kah Duee Kar Joree Astuti Toree Kahee Bidhi Karaun Ananta |
Maaya Gun Gyaana Teet Amaana Ved Puraan Bhananta |
Karuna Sukhasaagar Sub Gun Aagar Jehi Gaavaahin Shruti Santa |
So Mam Hit Laagee Jan Anuraagee Bhayau Pragat Shreekanta |
Bramaand Nikaaya Nirmit Maaya Rom-Rom Prati Ved Kahe |
Mam Ur So Baasee Yah Upahaasee Sunat Dheer Mati Thir Na Rahe |
Upaja Jab Gyaana Prabhu Muskaana Charit Bahut Bidhi Keenh Chahe |
Kahee Katha Suhaee Maatu Bujhaee Jehi Prakaar Soot Prem Lahe |
Maata Puni Bolee So Mati Dolee Tajahu Taat Yah Roopa |

Keejai Shishu Leela Ati Priyasheela Yah Sukh Param Anoopa |
Sunee Vachan Sujaana Rodan Thaana Hoee Baalak Surabhoopa |
Yah Charit Je Gaavahee Haripad Paavahee Te Na Parahin Bhavakoopa |

राम भजन (श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन )

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं ।

नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं ।

पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं ।

रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।

आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं ।

मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो ।

करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥ ॥सोरठा॥

जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।

मंजुल मंगल मूल वाम अङ्ग फरकन लगे।

रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

Śrī rāmacandra kr̥pālu bhajumana haraṇa bhavabhaya dāruṇaṁ. 
Nava kan̄ja lōcana kan̄ja mukha kara kan̄ja pada kan̄jāruṇaṁ.1. 
Kandarpa agaṇita amita chavi nava nīla nīrada sundaraṁ. 
Paṭapīta mānahum̐ taḍita ruci śuci nōmi janaka sutāvaraṁ.2. 
Bhaju dīnabandhu dinēśa dānava daitya vanśa nikandanaṁ. 
Raghunanda ānanda kanda kōśala canda daśaratha nandanaṁ.3. 
Śira mukuṭa kuṇḍala tilaka cāru udāru aṅga vibhūṣaṇaṁ. 
Ājānu bhuja śara cāpa dhara saṅgrāma jita kharadūṣaṇaṁ.4. 
Iti vadati tulasīdāsa śaṅkara śēṣa muni mana ran̄janaṁ. 
Mam hr̥daya kan̄ja nivāsa kuru kāmādi khaladala gan̄janaṁ.5. 
Mana jāhi rācyō milahi sō vara sahaja sundara sānvarō. 
Karuṇā nidhāna sujāna śīla snēha jānata rāvarō.6. 
Ēhi bhānti gaurī asīsa suna siya sahita hiya haraṣita alī. 
Tulasī bhavānihi pūjī puni-puni mudita mana mandira calī.7. .
Sōraṭhā. 
Jānī gaurī anukūla siya hiya haraṣu na jā'i kahi. 
Man̄jula maṅgala mūla vāma aṅga pharakana lagē. 
Racayitā: Gōsvāmī tulasīdāsa

राम जन्म की ख़ुशी में सोहर

अवध में बाजे बधईया, कौसल्या के ललना भये

नौमी तिथि, अति सीत न घामा, कौसल्या के ललना भये

राम जी के भईले जनमवा, चलहौ करि आई दरसनवा

रानी कौसल्या पलना झुलावै, देखि के बिहसै बदलवा

चलहौ करि आई दरसनवा… राम जी के भईले जनमवा,

चलहौ करि आई दरसनवा


राम चन्द्र भक्ति शायरी

निर्माता तुम जगत के तुम ही पालनहार ,
मुझ को भी आशीष दो हो मेरा उद्धार |

SHRI RAMNAVMI KAVITA POETRY
nirmaata tum jagat ke tum hee paalanahaar , 
mujh ko bhee aasheesh do ho mera uddhaar |

श्री राम शायरी

सुमिरन मै तुम्हरी करूँ , नित सुबह और शाम |
बस इतनी है आरजू , करो दया श्री राम ||

RAM NAVMI STATUS
sumiran mai tumharee karoon , nit subah aur shaam
bas itanee hai aarajoo , karo daya shree raam

जगत पालन की शायरी

बड़ा आपसे जगत में कहाँ किसी का नाम,
केवल सुमिरन मात्र से बनते बिगड़े काम|

PRABHU RAM JI KI SHAYRI
bada aapase jagat mein kahaan kisee ka naam, 
keval sumiran maatr se banate bigade kaam

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